Bucholz रिले क्या होता है और कैसे कार्य करता है?

buchholz relay installation on hpt high quality
Image 1


जैसे की यह एक रिले है और रिले वह डिवाइस होता होता जो किसी सर्किट में लगाए जाने पर उस सर्किट की रक्षा करता है (Image 2)। इसके लिए यह उस सर्किट के पैरामीटर्स जसे  के वोल्टेज, करंट, टेम्परेचर, प्रेशर आदि में एब्नार्मल बदलाव को डिटेक्ट करता है और किसी अनहोनी से पहले सर्किट को बंद कर देता है Image 3 और अगर  वह खुद ऐसा नहीं कर सकता तो वह सर्किट ब्रेकर को ट्रिपिंग सिग्नल देता है। ट्रिपिंग सिंगल अक्सर इलेक्ट्रिकल वोल्टेज के रूप में होता है जो ज्यादार 5 व् या १२ वाल्ट का होता है (Image 4)।
Relay block diagram or block representation detecting parameters
Image 2

Image 3

Image 4


अब बात करते इस रिले की; यह इलेक्ट्रिकल ट्रांसफार्मर को प्रोटेक्ट करने के लिए उपयोग होता है, और वैसे तो ट्रांसफार्मर स्टेटिक डिवाइस इसमें मोटर या जनरेटर की तुलना में फाल्ट काफी काम होते है लेकिन इस में उप्तन्न हुआ फाल्ट पूरी पॉवर ट्रांसमिशन या डिस्ट्रीब्यूशन की प्रणाली को बंद कर सकते है क्युकी ट्रांसफार्मर इस प्रणालीअ का सबसे मत्वपूर्ण अंग है।


Buchholz रिले पहली बार 1921 में  उपयोग हुआ था और इसे इंवेंट MaxBuchholz ने करा था। बुचोल्ज रिले एक गैस actuated रिले है और यह आयल immersed ट्रांसफार्मर में उपयोग होता है
यानि जो टांस्फॉर्मर हाई रेटिंग के होते है। अगर बात करे डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफर की तो इनमे Buchholz relay का उपयोग कम ही होता है क्युकी इनको तो हम फ्यूज से बी प्रोटेक्ट कर सकते है। इसका उपयोग ज्यादातर 500 के.वी.ए. के ऊपर रेटिंग वाले ट्रांसफॉर्मर को प्रोटेक्ट करने की करा जाता है।

यह ट्रांसफार्मर को निम्न प्रकार के फाल्ट से बचाता है:
१) कोर हीटिंग फाल्ट
२) वाइंडिंग फाल्ट
३) शार्ट सर्किट फाल्ट
४) इन्सिपिएंट फाल्ट

संरचना

यह मुख्य टंकी और कन्सेर्वटोर टंकी के मध्य एक नली द्वारा लगा होता है,
इसके ऊपर एक एरो बना होता है जो बताता है की मुख्य टंकी कहाँ होगी और कन्सेर्वटोर टंकी कहाँ होगा, तो जो एरो का अगला हिस्सा होता है यह कंज़र्वेटर टंकी के तरफ  होता है और पिछले हिस्सा मुख्या टंकी की तरफ।
इंस्टालेशन के समय इस एरो का ध्यान रखना जरूरी होता है अगर इसे उल्टा लगा दिया तो यह पूरी तरकीब से काम नहीं करेगा इसमें अंदर दो भुजा (arm) होती है पहली भुजा यहां से hinged होती और दूसरी इस बिंदु पर। ऊपर वाली भुजा में फ्लोटिंग बॉल लगी होती है जबकि निचे वाली भुजा में फ्लैप लगा होता है जो यहह मुख्य टंकी के वाल्व के सामने होता है और दोनों ही भुजाओं के ऊपर मरकरी स्विच लगे होते हैं। ऊपर वाला स्विच; अलार्म सर्किट में लगा होता है जबकि निचे वाला ट्रिप सर्किट में। इस चैम्बर में ऊपर की तरफ रिलीज़ कॉक होता है जबकि नीचे की तरफ टेस्ट कॉक होता है।





कार्यप्रणाली

अब बात करते है यह कार्य कसे करता है, तो यह जान लीजिये की ट्रांसफार्मर की वाइंडिंग के turns आपस में इंसुलाते होना किये, वाइंडिंग और कोर के बीच में भी इंसुलेशन प्रॉपर  होना चाहिए क्युकी इनके बीच kafi अधिक वोल्टेज डिफरेंस होता है, लेकिन फिर भी छोटे छोटे डिस्चार्ज यानि स्पार्क्स तो होते रहते है, क्यकि सिस्टम का वोल्टेज फ्लक्चुएट  होता रहता है, और जिन वीक पॉइंट्स पर डिस्चार्ज होता है वहां गर्मी उत्पन्न होती है और ऊपर पॉइंट पर आयल। अपनी छमता से ज्यादा गर्म होता है जिससे वह डकंपोज़ होने लगता है, आयल में कुछ सॉलिड कॉम्पोनेन्ट बनते है जो sludge यानि कीचड के रूप में निचे डिपोसिट होने लगते है और कई प्रकार की गैस बनती है,  आयल के अंदर कई प्रकार की गैस डिजॉल्व होती हैं जैसे हाइड्रोजन, नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, एसिटिलीन, प्रोपेन, ईथेन, ethylene, कार्बन मोनोऑक्साइड। जितना बड़ा डिस्चार्ज होगा उतनी ज़हरीली गैस उत्पन्न होगी. जसे की अगर काफी बड़ा डिस्चार्ज होता है तो काफी ऊष्मा उत्पन्न होगी तब ethylene और acetylene जैसी गैस उत्पन्न होगी। तो, अलग-अलग लेवल ऑफ़ डिस्चार्ज के लिए अलग अलग गैस का कॉम्बिनेशन मिलेगा। उत्पन्न हुए यह गैस के बुलबुले ऊपर उठते हैं कंज़र्वेटर टंकी में जाने के लये लकिन यह Buchholz रिले में फ़स जाते है और आयल का लेवल गिरने लगता है जिस से ऊपर वाली बाजु झुक जाती है और मरकरी स्विच चालू हो जाता है और अलार्म बज जाता है। यह स्तिथि बनती है इंसपिएंट फाल्ट की वजह से, मतलब जो फाल्ट भौत धीरे धीरे उत्पन्न होते है।
समय के सात साथ आयल की गुणवत्ता गिरने से भी ऐसा हो सकता है। इस से इंडिकेशन भी मिलता है की आयल चेंज करने का समय आ गया है। अलार्म को बंद करने के लिए रिलीज़ कॉक से गैस को रिलीज़ कर दिया जाता है और गैस का सैंपल भी ले लिया जाता है ताकि लैब में टेस्ट करके जाना जा सके की ट्रांसफार्मर के अंडर किस लेवल का डिस्चार्ज हो रहा है or आयल बदलने की स्तिथि आ चुकी है की नहीं, जो की भौत जरूरी प्रक्रिया है अगर आयल को समय पर नहीं बदला जायेगा तो तो ट्रांसफार्मर का कूलिंग एक्शन इतना घट जाएगा की उसकी पूरी इंसुलेशन खराब हो जायेगी।

buchholz relay working in condition of incipient fault only alarm signal


इन्सिपिएंट फाल्ट के अलावा जो दूसरे तरह फाल्ट होते है उनमे डिस्चार्ज का लेवल इनता बढ़ जाता है की वहां पर इंसुलेशन पूरी तरह खराब हो जाती है और टर्न्स आपस में शार्ट हो जाते है, जय फिर वाइंडिंग और कोर के बीच इलेक्ट्रिकल कंडक्शन चालू हो जाता है जिस से करंट एअर्थ में जाने लगता है इस प्रकार के फाल्ट में।ट्रांसफार्मर आयल भौत तेजी से गर्म होता है और उबलने लगता है जिससे से यह  तेज़ी से एक्सपान्ड होता है और कंज़र्वेटर टंकी की और बढ़ता है। आयल और गैस के काफी तेज़ बहाव  होने की वह से यह फ्लैप पीछे हटता है और यह वाला मरकरी स्विच चालू हो जाता है, सीधा सर्किट ब्रेकर को ट्रिप सिग्नल जाता है और ट्रांसफार्मर मुख्य सप्लाई से कट जाता है। और ट्रांसफार्मर के साथ-साथ पूरा सिस्टम डैमेज होने से बच जाता है परमानेंट डैमेज से बच  जाता है।


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